CCI की जांच में खुला बड़ा स्टील खेल: Tata Steel, JSW Steel और SAIL पर एंटीट्रस्ट कानून उल्लंघन का आरोप

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India या CCI) ने देश की प्रमुख स्टील कंपनियों—Tata Steel, JSW Steel और Steel Authority of India Ltd (SAIL)—सहित कुल 25 कंपनियों को एंटीट्रस्ट कानूनों (Competition Act) का उल्लंघन करने का दोषी पाया है। यह जानकारी एक गोपनीय CCI आदेश पर आधारित है, जिसकी रिपोर्ट पहली बार अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने प्रकाशित की है। 

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इस आदेश के अनुसार CCI को यह संदेह है कि इन सभी कंपनियों ने आपस में मिलकर स्टील की बिक्री कीमतों को नियंत्रित किया और बाजार प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन किया, जिससे उपभोक्ताओं और अन्य प्रतिस्पर्धी खुदरा एवं निर्माण कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा। 

जाँच की शुरुआत और विस्तार

यह मामला 2021 में उस समय शुरू हुआ जब तमिलनाडु के कोयंबत्तूर में बिल्डरों के एक समूह ने अदालत में आरोप लगाया था कि कई स्टील उत्पादक कंपनियां आपसी बातचीत से सप्लाई सीमित कर रही हैं और कीमतें बढ़ा रही हैं। इस शिकायत के बाद CCI ने जांच शुरू की। बाद में यह जांच व्यापक हुई और 31 कंपनियों तथा दर्जनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विस्तारित कर दी गई। 

CCI के नियमों के अनुसार, जब तक मामला अपने निष्कर्ष तक नहीं पहुँचता, तब तक इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। हालांकि 6 अक्टूबर 2025 को CCI ने एक आदेश पारित किया था, जो अब पहली बार रिपोर्ट किये जा रहे हैं। 

क्या माना गया उल्लंघन?

प्रतिस्पर्धा आयोग ने पाया कि इन कंपनियों ने 2015 से 2023 तक अलग-अलग समय पर मिलकर स्टील बेचने की कीमतों पर साठगांठ की है और सप्लाई को नियंत्रित किया है, जो कि भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के खिलाफ है। इस तरह की गतिविधियाँ आम बाजार प्रतिस्पर्धा को कमजोर करती हैं और ग्राहकों तथा अन्य उद्योगों में मूल्य बढ़ोतरी का कारण बनती हैं। 

CCI ने यह भी पाया कि कुछ कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी—जिनमें JSW Steel के MD Sajjan Jindal, Tata Steel के CEO T.V. Narendran और SAIL के चार पूर्व चेयरपर्सन शामिल हैं—भी इस उल्लंघन में सीधे तौर पर शामिल रहे। ऐसे कुल 56 वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिम्मेदार बताया गया है।

सबूत और जांच पर क्या मिला?

जांच के दौरान, CCI अधिकारियों ने कई प्रकार के दस्तावेजों एवं संचार को देखा, जिनमें WhatsApp संदेश भी शामिल हैं जो दिखाते हैं कि स्टील उत्पादक कंपनियों की एक औद्योगिक समूह बातचीत ने कीमतों और उत्पादन के पैटर्न को प्रभावित किया। यह CCI के लिए महत्वपूर्ण संकेत था कि बाज़ार में निजी समझौता हुआ है न कि स्वतः प्रतिस्पर्धा उपलब्ध है।

इसके अलावा CCI ने आरोपित कंपनियों से 2015 से 2023 तक के आठ वित्तीय वर्षों के audited financial statements जमा करने को कहा है, ताकि संभावित दंड की गणना के लिए व्यापक डेटा उपलब्ध हो सके। 

क्या दंड लगाया जा सकता है?

भारतीय प्रतिस्पर्धा नियमों के तहत, CCI कंपनियों पर उन वर्षों के लिए तीन गुना प्रॉफिट या 10% टर्नओवर (जो भी अधिक हो) तक का जुर्माना लगा सकती है। इससे न केवल कंपनियों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि उनके संचालन और बाज़ार विश्वास पर भी बड़ा असर पड़ेगा। इसी तरह वरिष्ठ अधिकारियों पर भी व्यक्तिगत जुर्माना लगाया जा सकता है। 

स्टॉक मार्केट और शेयर रिएक्शन

जब इस रिपोर्ट की जानकारी बाजार में आई, तो प्रमुख स्टील कंपनियों के शेयरों में नरमी देखने को मिली। JSW Steel के शेयरों में गिरावट आई, SAIL के शेयर लगभग 3% नीचे गए और Tata Steel के शेयरों में भी कमजोरी का प्रभाव दिखा। इस वजह से निफ्टी मेटल इंडेक्स का रुझान भी नकारात्मक रहा। 

विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही यह जांच आगे बढ़ेगी और CCI का अंतिम निर्णय—जहाँ कंपनियों और वरिष्ठ अधिकारियों को आपत्तियाँ प्रस्तुत करने का मौका भी मिलेगा—बाजार की धारणा पर और प्रभाव डाल सकता है। 

CCI की भूमिका और भारतीय स्टील उद्योग का महत्व

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा स्टील उत्पादक देश है और स्टील उद्योग का योगदान न केवल निर्माण एवं बुनियादी ढांचे में है, बल्कि यह परिवहन, ऑटोमोबाइल और भारी उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। CCI का कार्य है भारत में प्रतिस्पर्धा को संरक्षित करना और व्यापारिक नेतागणों को स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धा करने के नियमों के अंतर्गत रखना। 

अगर कोई भी कंपनी प्रतियोगी नियमों का उल्लंघन करती है—जैसे कि साठगांठ, कीमत नियंत्रण, उत्पादन को सीमित करना आदि—तो वह उपभोक्ता हितों को नुकसान पहुँचाती है और बाज़ार में असंतुलन पैदा करती है। इसीलिए CCI जैसी संस्थाएँ उद्योगों में निष्पक्ष व्यापार के लिए कड़ी निगरानी रखती हैं। 

अब आगे क्या होगा?

CCI अब अपने आदेश की समीक्षा के बाद कंपनियों और अधिकारियों को आपत्तियाँ दर्ज करने का मौका देगा। यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है। उसके बाद CCI अंतिम आदेश जारी करेगा, जिसमें दंड और संभावित प्रतिबंधों की घोषणा हो सकती है। इस अंतिम निर्णय को सार्वजनिक किया जाएगा और इसके परिणाम पूरे स्टील उद्योग पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। 

निष्कर्ष

Competition Commission of India की जांच ने भारतीय स्टील उद्योग में प्रतिस्पर्धा कानून उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं। Tata Steel, JSW Steel, SAIL और अन्य कंपनियों को मिलकर बाजार कीमतों को नियंत्रित करने व प्रतिस्पर्धा को सीमित करने का दोषी पाया गया है। CCI की कार्रवाई न केवल कंपनियों पर जुर्माने की सम्भावना को जन्म देती है, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार और उपभोक्ता हितों पर भी यह महत्वपूर्ण असर छोड़ सकती है। 


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