भारत का निर्यात 850 अरब डॉलर के करीब पहुंच सकता है, लेकिन US Trade Deal और EU CBAM चुनौती बने

चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के निर्यात में एक नई मिसाल बनने की संभावना जताई जा रही है। सर्विस सेक्टर के मजबूत योगदान से अप्रैल-नवंबर 2025 तक भारत का कुल निर्यात लगभग 562 अरब डॉलर हो चुका है और वर्ष के अंतिम चार महीनों से यह संख्या बढ़कर 850 अरब डॉलर को छू सकती है। हालांकि, कुछ वैश्विक चुनौतियाँ निर्यात की गति को प्रभावित कर सकती हैं, जिनमें यूएस के साथ व्यापार समझौते की देरी और यूरोपीय संघ की Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) प्रमुख हैं। 

india exports 850b us deal eu cbam challenges 2025


भारत के निर्यात में सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका

भारत का निर्यात पहले केवल वस्तुओं तक सीमित था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सेवा क्षेत्र की भूमिका बढ़ी है। सेवा क्षेत्रों जैसे IT, बिजनेस प्रोसेसिंग, और कंसल्टिंग सर्विसेज़ के निर्यात की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। इसी वजह से कुल निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने में सेवा क्षेत्र एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेवा क्षेत्र निरंतर मजबूती से प्रदर्शन करता है और वस्तु निर्यात में भी रिकवरी आती है, तो 850 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य वायरस से प्रभावित नहीं होकर आसानी से हासिल किया जा सकता है। 

अमेरिका के साथ व्यापार समझौता: निर्यात को मिलेगा समर्थन या बाधा?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता पर बातचीत चल रही है और यह समझौता निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अमेरिका भारत का एक बड़ा निर्यात बाजार है और यदि tariff barriers (शुल्क प्रतिबंध) हटाए जाते हैं, तो भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। लेकिन, ऐसे समझौते में देरी होने से कई निर्यात कंपनियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। :contentReference[oaicite:4]{index=4}

यद्यपि अमेरिका के बाजार में शुल्क समस्याएँ हैं, फिर भी कई व्यापार विशेषज्ञ इसे भारत के निर्यात नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के अंतिम चरण में होने के बावजूद, इसमें अभी भी कुछ स्थिरता की आवश्यकता है ताकि निर्यातकों को भरोसा मिल सके और निर्यात वृद्धि तेज़ हो सके।

EU CBAM: निर्यात के लिए बड़ी चुनौती

एक और प्रमुख चुनौती जो भारत के निर्यात मार्ग में खड़ी है, वह है यूरोपीय संघ की Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM). यह एक कार्बन आधारित सीमा टैक्स प्रणाली है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो रही है और यूरोपीय बाजार में उच्च कार्बन उत्सर्जन वाले उत्पादों के लिए अतिरिक्त शुल्क लागू करेगी। 

CBAM के तहत, विशेष रूप से स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट जैसे भारी उद्योगों के उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगाया जाएगा, जिससे भारत के इन उद्योगों के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय आयोग की CBAM नीति भारतीय उत्पादों को महंगा और प्रतिस्पर्धा के लिए कठिन बना सकती है। 

Global Trade Research Initiative (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, अगर CBAM की तैयारी समय पर पूरी नहीं होती है, तो भारतीय स्टील और एल्यूमिनियम निर्यात को झटका लग सकता है और निर्यात में गिरावट हो सकती है। GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अपने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग सिस्टम (CCTS) को तेजी से लागू करना चाहिए ताकि CBAM की चुनौतियों से निपटा जा सके। 

वस्तु एवं सेवा निर्यात के रुझान

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात लगभग 825 अरब डॉलर रहा था, जिसमें वस्तु निर्यात और सेवा निर्यात दोनों शामिल थे। वस्तु निर्यात का योगदान पिछले वर्षों के समान स्तर पर रहा, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव सेवा निर्यात में आया, जिसने पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया। इस वजह से कुल निर्यात लक्ष्यों के प्रति आशावाद बढ़ा है। 

विशेषज्ञ बताते हैं कि निर्यात को और अधिक बढ़ाने के लिए भारत को अपनी उत्पाद गुणवत्ता, निर्माण लागत और वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी पर काम करना होगा, ताकि विदेशी मार्केट में और मजबूत प्रभाव छोड़ा जा सके। 

चुनौतियाँ और जोखिम

भारत के निर्यात लक्ष्य को 850 अरब डॉलर तक पहुंचाने में कुछ चुनौतियाँ हैं:

  • CBAM से प्रभावित भारी उद्योग, विशेषतः स्टील और एल्युमीनियम में उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। :contentReference[oaicite:11]{index=11}
  • US-India व्यापार समझौते की देरी निर्यातकों को लगातार असर में रख सकती है। 
  • मौजूदा वैश्विक मंदी और संरक्षणवादी नीतियाँ निर्यातों पर अनिश्चितता बढ़ा सकती हैं। 

सरकार और नीति-निर्माताओं की भूमिका

विश्लेषकों का सुझाव है कि निर्यात की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार को कई कदम उठाने होंगे:

  • CBAM के लिए तैयारियाँ तेजी से पूरी करें और carbon compliance सुविधाएँ विकसित करें। 
  • US और EU के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दें ताकि tariff barriers कम हों। 
  • MSME निर्यातकों को प्रशिक्षण और संसाधन सहायता प्रदान करें।

निष्कर्ष

2025-26 में भारत के निर्यात के रास्ते में 850 अरब डॉलर को छूने का एक मजबूत अवसर है, लेकिन इसे हासिल करने में कुछ वैश्विक और नियामक बाधाएँ हैं। सेवा निर्यात का योगदान और संभावित व्यापार समझौते भारत को निर्यात में नया रिकॉर्ड बनाने में मदद कर सकते हैं, जबकि CBAM जैसी चुनौतियाँ इसके लिए रणनीतिक रणनीति की मांग करती हैं। 

#IndiaExports #TradeNews #CBAM #USIndiaDeal #850BillionExport #GlobalTrade

Post a Comment

Previous Post Next Post